AI-सक्षम ब्राऊज़र अब सुरक्षित नहीं रहे — Security researchers ने एक नया खतरा पाया है, जिसका नाम है HashJack. इसके साथ ही, मैसेजिंग ऐप्स जैसे Signal और WhatsApp यूज़र्स (भारत सहित दुनियाभर में) के लिए Spyware के ज़रिए खतरनाक साइबर हमले जारी हैं।
HashJack — वो हमला जो दिखता है बिलकुल सुरक्षित

रिसर्चर फर्म Cato Networks ने चेतावनी दी है कि HashJack नाम के हमले में हैकर्स किसी भी सामान्य वेबसाइट का URL लेकर उसे खतरनाक बना सकते हैं। तरीका कारगर है — URL के अंत में # (hash) चिह्न के बाद थोड़ा-सा मैलिशियस कोड छुपा दिया जाता है। जब आप AI-ब्राऊज़र में उस लिंक को खोलते हैं और AI असिस्टेंट से कुछ पूछते हैं — तो वो छुपा निर्देश (prompt) execute हो जाता है। कुछ प्रकार के हमले जो इससे हो सकते हैं:
पासवर्ड या निजी जानकारियाँ चोरी हो जाना।
फ़िशिंग लिंक या मैलवेयर जुड़ी फाइल खुद-ब-खुद डाउनलोड हो जाना।

गलत या भ्रामक जानकारी (misinformation) AI द्वारा देने का खतरा।
यानी — एक भरोसेमंद वेबपेज, लेकिन उसमें लगे URL के ज़रिए AI-ब्राऊज़र भरोसा कर बैठे, और सारी सुरक्षा धरी की धरी रह जाए।
> “Trusted URL. Clean webpage. Compromised AI browser assistant.” — Cato Networks रिपोर्ट
Spyware और मैसेजिंग ऐप्स – आपकी निजी ज़िंदगी को घेर रहा खतरा
इतना ही नहीं — सिर्फ ब्राऊज़र नहीं, बल्कि आपके मोबाइल मैसेजिंग ऐप्स पर भी खतरा मंडरा रहा है। अमेरिकी साइबर सुरक्षा एजेंसी CISA ने अलर्ट जारी किया है कि साइबर अपराधी अब एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स जैसे Signal और WhatsApp पर Advanced Spyware / RATs का इस्तेमाल कर रहे हैं।
कैसे? Phishing, QR-code scams, या zero-click exploits के ज़रिए यूज़र का फोन संक्रमित कर लिया जाता है। इसके बाद मैलवेयर बैकग्राउंड में काम करता है — आपके संदेश, फोटो, ऐप-डेटा, पासवर्ड, कॉन्टैक्ट्स सब चोरी हो सकते हैं। खास बात — कभी यूज़र को पता भी नहीं चलता।

हमें क्या सावधानियाँ बरतनी चाहिए
इस आधुनिक युग की बढ़ती खतरनाक AI-साइबर सुरक्षा चुनौतियों से बचने के लिए हमें ये कदम उठाने चाहिए:
संशयित लिंक्स पर क्लिक न करें — खासकर अगर URL अजीब लगे या Social Media / Email से मिले हों।
Scrutinize URLs carefully — hash (#) के बाद कुछ संदिग्ध दिखने वाले हिस्से हों, तो समझ जाइए हो सकता है HashJack हो।
AI-ब्राऊज़र असिस्टेंट इस्तेमाल करते समय सतर्क रहें — जब ब्राऊज़र से जवाब आए, तो सोच-समझकर क्लिक करें।
Instant-Messaging Apps की Security Settings चेक करें — Two-Factor Authentication (2FA) चालू रखें, ऐप्स अपडेट रखें, अनजान QR या लिंक न खोलें।
Spyware से बचने के लिए VPN, Antivirus, phone lock, and secure authentication (FIDO / password manager) अपनाएँ।

निष्कर्ष — AI के साथ बढ़ा है Cyber खतरा, बचाव हमारी जिम्मेदारी
AI ने हमारी ज़िंदगी आसान की है — स्मार्ट ब्राऊज़िंग, आसान सर्च, फास्ट रिकमेंडेशन। लेकिन जैसा हमें फायदा देगा, ठीक वैसा ही इसके उपयोग में सावधानी भी ज़रूरी है।
अगर हम सतर्क नहीं रहेंगे, तो ये नई तकनीकें हमारे निजी डेटा, सुरक्षा और भरोसे को खतरे में डाल सकती हैं। इसलिए — हर लिंक, हर मैसेजिंग ऐप, हर AI-assistant से पहले एक बार दो बार सोचना ज़रूरी है।
AIHindiHub.com के साथ बने रहिए, मैं लाता रहूँगा ऐसे Real-Time अपडेट्स — ताकि आप हमेशा एक कदम आगे रहें।
**खतरा है, लेकिन बचाव आपके हाथ में है! Stay alert, stay safe.**